इस तकनीक की खास बात यह है कि इसमें खेत की जुताई नहीं करनी पड़ती. आलू की खेती सीधे खेत की सतह पर की जाती है, जिससे मजदूरों की जरूरत काफी कम हो जाती है. यदि किसान इस विधि को अपनाते हैं, तो जुताई और मजदूरी पर होने वाला खर्च काफी हद तक बच सकता है. इतना ही नहीं, इस पद्धति से आलू की पैदावार में 15 से 20 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी भी देखी जा रही है.
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