महाराज रामेश्वर सिंह द्वारा उल्टा स्वास्तिक बनवाया गया है. जो आज भी सुरक्षित है.कारण पारंपरिक कलात्मक या वास्तुशिल्प के बजाय एक दार्शनिक और प्रतीकात्मक उद्देश्य था. साथ ही महराज तंत्र साधक थे, तांत्रिक विधि से पूजा पाठ करते थे यह भी कारण है. आध्यात्मिकता के प्रति अपनी गहरी भक्ति और वे इसे अपनी व्यक्तिगत पहचान का हिस्सा मानते थे उल्टा स्वास्तिक .कुछ
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